अध्याय 1: अजनबी किरायेदार
बनारस की पतली गलियों में एक मोहल्ला था – काशीपुरा, जहाँ समय जैसे रुक गया था। यहाँ के मकान सौ साल पुराने थे और दीवारें जैसे अपने अंदर सैकड़ों कहानियाँ समेटे थीं। इन्हीं गलियों में एक पुराना घर था – राजन निवास, जहाँ पहली मंजिल पर रहती थीं नीलम चाची। विधवा, शांत स्वभाव की, पर मोहल्ले भर में उन पर कई किस्से चलते थे। लोग कहते थे उनके पति की मौत सामान्य नहीं थी।
इसी मोहल्ले में एक दिन नया किरायेदार आता है – राघव मिश्रा। पेशे से पत्रकार, पर इन दिनों वो अखबार से इस्तीफा देकर फ्रीलांस क्राइम रिपोर्टिंग कर रहा था। उसका मकसद था – पुराने अनसुलझे मामलों की तह तक पहुँचना और सच्चाई सामने लाना।
पहले ही दिन जब राघव सामान लेकर अपने कमरे में चढ़ रहा था, सामने नीलम चाची बालकनी से उसे देखती हैं। उनकी आँखों में एक अजीब सा मिश्रण था – जिज्ञासा, डर, और छिपी हुई पीड़ा।
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अध्याय 2: पुरानी फाइलें और नई पड़ताल
राघव ने जैसे ही इलाके की हवा में कुछ अजीब सा महसूस किया, उसने आसपास के लोगों से बातचीत शुरू की। एक पानवाले से पता चला कि चाची का पति – दीनानाथ जी, दो साल पहले छत से गिरकर मरा था, लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह कोई हादसा नहीं था।
राघव को यह मामला दिलचस्प लगने लगा। एक दिन उसे चाची की बालकनी के नीचे एक टूटी डायरी का पन्ना मिलता है – उस पर कुछ कोडवर्ड में लिखा था:
> “B-23 | रात 3 बजे | दस्तावेज़ बदलें | सावधान – आवाज़ मत करना।”
राघव को यकीन हो गया कि ये मामला एक गहरा राज छुपाए हुए है।
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अध्याय 3: अंधेरे में आवाज़ें
रात को लगभग 2:30 बजे राघव को पास के घर से धीमी आवाज़ें सुनाई देती हैं – जैसे कोई खुसर-पुसर कर रहा हो। वह अपनी रिकॉर्डिंग डिवाइस लेकर छत की तरफ बढ़ता है। वहीं उसे एक साया दिखाई देता है जो किसी पुरानी अलमारी से कुछ निकालकर छुपा रहा था।
अगले दिन वह चाची से बात करने की कोशिश करता है। नीलम चाची शांत रहती हैं, पर उनकी आँखें डर से भरी होती हैं।
राघव को अब यकीन हो गया कि वह अकेला नहीं है जो इस रहस्य की परतों को खोलना चाहता है – कोई और भी है जो इसे छुपाने की कोशिश कर रहा है… किसी भी कीमत पर।
अध्याय 4: काग़ज़ जो सब कुछ बदल देंगे
राघव की रातें अब शांत नहीं थीं। उस रात रिकॉर्डिंग डिवाइस में जो आवाजें कैद हुई थीं, उन्हें सुनकर उसके रोंगटे खड़े हो गए। किसी की फुसफुसाती आवाज़ आई थी:
> "वो फाइल अभी भी उसके पास है… अगर वो लीक हो गई, तो हम सब गए।"
सुबह होते ही राघव ने मोहल्ले की छतों का चक्कर लगाया और वही पुरानी अलमारी खोज निकाली। दीवार में एक गुप्त खांचा था – चूने की परत हटाते ही वहाँ से एक पुराना स्टील का बॉक्स निकला। अंदर थीं कुछ फाइलें, फोटो और एक फ्लैश ड्राइव।
फाइलों में से एक पर लिखा था – “काशीपुरा हाउस डील – गोपनीय”
फ्लैश ड्राइव जब राघव ने अपने लैपटॉप में लगाई, तो उसमें जमीन खरीद-बिक्री के नक्शे, ट्रांसफर लेटर्स, और एक क्लिप थी – जिसमें एक बड़ा नाम सुनाई देता है:
> "…वर्मा जी को चुप करा दिया गया है। अगला नम्बर नीलम पर है…"
राघव सन्न रह गया।
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अध्याय 5: नीलम की चुप्पी टूटती है
उस शाम राघव ने नीलम चाची को सामने बैठाया। "चाची, आपके पति की मौत… वो कोई हादसा नहीं था, है न?"
चाची की आँखों में आँसू आ गए। बहुत देर चुप रहने के बाद उन्होंने धीरे से कहना शुरू किया:
> “दीनानाथ एक ईमानदार आदमी था। उसे पता चला था कि कुछ लोग इस मोहल्ले के मकानों को जबरन हथियाना चाहते हैं – फर्जी काग़ज़ बनाकर। उसने विरोध किया, और… एक दिन छत से गिर गया… या शायद गिराया गया।”
राघव ने सबूत उन्हें दिखाए। चाची काँप गईं। "अगर ये सामने आ गया तो… वो लोग मुझे भी नहीं छोड़ेंगे।"
राघव ने कहा, “अब आप अकेली नहीं हैं।”
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अध्याय 6: पर्दाफाश की तैयारी
राघव ने इंस्पेक्टर जोशी से संपर्क किया। पहले तो जोशी ने बात को हल्के में लिया, लेकिन जब फ्लैश ड्राइव में मौजूद दस्तावेज़ देखे, तो वो चौंक गया। उसमें काशीपुरा के कई मकानों की खरीद-फरोख्त में एक नाम बार-बार आ रहा था – अमरेश राठौर, एक स्थानीय बिल्डर और समाजसेवी के नकाब में छिपा माफिया।
राघव, चाची और इंस्पेक्टर ने मिलकर प्लान बनाया – एक सार्वजनिक जनसुनवाई में ये सबूत सामने लाने का। लेकिन खतरा बढ़ गया था… राठौर को भनक लग चुकी थी कि कोई उसकी पोल खोलने वाला है।
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अगला अध्याय:
"अध्याय 7: मौत की घड़ी" – जहाँ खतरा राघव और चाची के दरवाज़े तक आ जाएगा।
क्या वे सच को सामने ला पाएंगे, या परछाइयों में गुम हो जाएगा सच?
Comeing soon........
काल्पनिक नोट (Fictional Disclaimer):
यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इसमें वर्णित सभी पात्र, स्थान, और घटनाएं लेखक की कल्पना का परिणाम हैं। किसी जीवित या मृत व्यक्ति से इसका कोई संबंध मात्र संयोग है। यह कहानी मनोरंजन एवं साहित्यिक उद्देश्य से लिखी गई है। लेखक किसी भी प्रकार की असामाजिक, अवैध या अनैतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित नहीं करता।

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