शौक़ीन पुलिस वाली
शहर की नई सब-इंस्पेक्टर सीमा राठौर जब थाने में तैनात हुई, तो सभी उसकी खूबसूरती और तेज़तर्रार अंदाज़ से प्रभावित हुए। मगर कोई नहीं जानता था कि वर्दी के पीछे छिपा था एक बेहद ख़तरनाक खेल। सीमा सिर्फ कानून की रखवाली नहीं कर रही थी, बल्कि अपने अजीब और खतरनाक शौक पूरे करने के लिए वर्दी का इस्तेमाल कर रही थी।
सीमा का असली शौक़ था — जवान, अकेले और असहाय लड़कों को फंसाना। वह सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर उन्हें बातों में उलझाती, फिर असली पहचान उजागर कर उन्हें अपनी पहुंच में लाती। जब लड़के उसके जाल में फंस जाते, तो वह उन्हें धमकाकर अपने इशारों पर चलने के लिए मजबूर करती।
कुछ को वह 'खास केस' बताकर थाने बुलाती, और फिर बंद कमरे में उनकी मजबूरी का फायदा उठाती। कई बार वह उन्हें छोटे-मोटे केस में फंसा देने की धमकी देकर ब्लैकमेल करती। जो नहीं मानते, वे या तो गायब हो जाते या शहर छोड़ देते। लेकिन यह सब इतने चालाकी से होता कि किसी को उस पर शक तक नहीं होता।
शहर में लगातार युवकों की गुमशुदगी बढ़ने लगी। मगर सारे केस ऐसे थे जिनमें कोई सबूत नहीं, कोई गवाह नहीं। पुलिस के अंदरूनी हलकों में भी धीरे-धीरे खुसपुसाहट शुरू हो गई। मगर सीमा की पहुंच ऊपर तक थी — वह खुद केस की जांच करती और सबूत गायब कर देती।
लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब एक युवा लड़का — अर्जुन — उसकी चालों का शिकार बनने से बाल-बाल बचा। अर्जुन ने समझदारी से काम लिया और उसकी बातचीत रिकॉर्ड कर ली। इसके बाद वह सीधे मीडिया के पास गया और पूरा मामला उजागर कर दिया।
मीडिया में बवाल मच गया। उच्च अधिकारियों ने फौरन जांच बिठाई। जब सीमा के मोबाइल, कंप्यूटर और निजी रिकॉर्ड खंगाले गए, तो कई चौंकाने वाले राज़ सामने आए। कई युवकों के वीडियो, चैट्स और रिकॉर्ड्स मिले जो उसने जबरन बनाए थे। कुछ युवक तो दो साल से लापता थे जिनका नाम उसकी फाइलों में दर्ज मिला।
आखिरकार सीमा को गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट में उसके खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए गए और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह केस पुलिस विभाग के लिए भी एक बड़ा धक्का था — क्योंकि अपराध जब कानून के रक्षक ही करने लगें, तो भरोसा डगमगाने लगता है।
सीमा अब जेल में है, मगर उसका नाम अब भी लोगों की जुबान पर है — एक ऐसी वर्दी वाली जो इंसाफ की नहीं, अपने शौक की भूखी थी।

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