एक लड़की बनी हवस का शिकार (काल्पनिक कहानी)

रुही, एक छोटे से गांव की 17 वर्षीय लड़की, अपने सपनों और उम्मीदों के साथ एक साधारण जीवन जी रही थी। वह स्कूल की होनहार छात्रा थी और उसके माता-पिता उसकी पढ़ाई को लेकर बहुत आशावान थे। हर दिन की तरह वह सुबह स्कूल जाती, शाम को अपने छोटे भाई के साथ खेलती और रात को माँ के साथ रसोई में हाथ बंटाती।

गांव में एक नया आदमी आया था – रमेश, जो बाहर से नौकरी छोड़कर वापस अपने गांव लौटा था। शुरू में वह काफी सभ्य और मददगार नजर आया। वह अक्सर गांव के बच्चों को मिठाई देता, बूढ़ों की मदद करता और लोगों का विश्वास जीतता। लेकिन उसके इरादे कुछ और ही थे।

एक दिन जब रुही स्कूल से लौट रही थी, रास्ते में रमेश ने उसे रोककर कहा, "तेरी माँ ने मुझे भेजा है, वो बीमार है, जल्दी चल!" भोली रुही घबरा गई और उसके साथ चल पड़ी। लेकिन वह उसे रास्ते से हटाकर एक सुनसान झोपड़ी में ले गया।

झोपड़ी में पहुँचते ही रमेश का असली चेहरा सामने आ गया। रुही को एहसास हुआ कि वह खतरे में है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसने भागने की बहुत कोशिश की, चिल्लाई, लेकिन वह सुनसान जगह थी, कोई सुनने वाला नहीं था। रमेश ने उसकी मासूमियत को रौंद डाला।

कई घंटे बाद, जब रुही वापस आई तो उसका चेहरा डर, दर्द और अपमान से भरा था। माँ ने जैसे ही उसकी हालत देखी, वह सब समझ गई। पूरा गांव सन्न रह गया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई और रमेश को गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में लंबी लड़ाई के बाद रमेश को उम्रकैद की सजा मिली।

रुही का जीवन एक झटके में बदल गया था। लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने थैरेपी ली, समाज की नज़रों से लड़ना सीखा और दो साल के भीतर फिर से स्कूल जाना शुरू किया। अब वह महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली एक सामाजिक कार्यकर्ता है।

उसकी कहानी हमें यह सिखाती है कि मुश्किलें चाहे जितनी भी बड़ी हों, हिम्मत और आत्मबल से हर दर्द को पार किया जा सकता है। साथ ही यह भी कि समाज को ऐसी घटनाओं पर चुप नहीं बैठना चाहिए, बल्कि आवाज़ उठाकर न्याय की लड़ाई में साथ देना चाहिए।

याद रखिए

यह कहानी सिर्फ रुही की नहीं है, बल्कि हर उस लड़की की है जो किसी दरिंदे की हवस का शिकार बनती है। हमें जरूरत है एक सुरक्षित समाज की, जहाँ हर बच्ची, हर महिला बिना डर के जी सके।


सावधानी: अगर आप या कोई जानने वाला इस तरह की घटना से गुजर रहा है, तो चुप न रहें। पुलिस, परामर्शदाता या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से मदद लें। आपकी आवाज़ बदलाव ला सकती है।

काल्पनिक नोट: यह कहानी पूर्ण रूप से काल्पनिक है। इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना है। इसमें वर्णित पात्र, स्थान और घटनाएँ काल्पनिक हैं। किसी जीवित या मृत व्यक्ति से इसका कोई संबंध मात्र संयोग हो सकता है।

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